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mahabharat 13.144.8-9: भीष्मजी बोले- पुत्र! अब मैं तुमसे एक बहुत ही सुन्दर कथा कहता हूँ। राजन! मैंने पूर्वकाल में भगवान नारायण और महादेवजी के प्रभाव के विषय में सुना है तथा पार्वतीजी के संदेह प्रकट करने पर शिव और पार्वती के बीच जो संवाद हुआ था, उसे भी सुना है। सुनो।   |   mahabharat अध्याय 13.144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  13.144.8-9 
भीष्म उवाच
अहं ते कथयिष्यामि कथामतिमनोहराम्।
अस्य विष्णो: पुरा राजन् प्रभावो यो मया श्रुत:॥ ८॥
यश्च गोवृषभाङ्कस्य प्रभावस्तं च मे शृणु।
रुद्राण्या: संशयो यश्च दम्पत्योस्तं च मे शृणु॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले- पुत्र! अब मैं तुमसे एक बहुत ही सुन्दर कथा कहता हूँ। राजन! मैंने पूर्वकाल में भगवान नारायण और महादेवजी के प्रभाव के विषय में सुना है तथा पार्वतीजी के संदेह प्रकट करने पर शिव और पार्वती के बीच जो संवाद हुआ था, उसे भी सुना है। सुनो।
 
Bhishmaji said-Son! Now I am telling you a very beautiful story. King! I have heard about the influence of Lord Narayana and Mahadevji in the past and also the conversation that took place between Shiva and Parvati when Parvatiji expressed doubts. Listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)