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mahabharat 13.144.36: वही अग्निरूपी आत्मा मेरे पास लौट आया है और निकट पहुँचकर शिष्य के समान मेरी सेवा करने के लिए मेरे चरणों में झुक गया है। इसके बाद वह शान्त हो गया और अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त हो गया ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 13.144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.144.36 
सोऽयं वह्निरुपागम्य पादमूले ममान्तिकम्।
शिष्यवत् परिचर्यार्थं शान्त: प्रकृतिमागत:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वही अग्निरूपी आत्मा मेरे पास लौट आया है और निकट पहुँचकर शिष्य के समान मेरी सेवा करने के लिए मेरे चरणों में झुक गया है। इसके बाद वह शान्त हो गया और अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त हो गया ॥36॥
 
The same soul in the form of fire has returned to me and on reaching close, he bowed down at my feet to serve me like a disciple. After this, he became calm and regained his previous state. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)