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mahabharat 13.144.31: उसी तेज के कारण आप जैसे महान तपस्वी, देवताओं के समान पराक्रमी, क्रोध को जीतने वाले और इन्द्रियों को वश में रखने वाले ऋषिगण भी दुःखी और व्यथित हो गए॥31॥   |   mahabharat अध्याय 13.144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.144.31 
ऋषयश्चार्तिमापन्ना जितक्रोधा जितेन्द्रिया:।
भवन्तो व्यथिताश्चासन् देवकल्पास्तपोधना:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उसी तेज के कारण आप जैसे महान तपस्वी, देवताओं के समान पराक्रमी, क्रोध को जीतने वाले और इन्द्रियों को वश में रखने वाले ऋषिगण भी दुःखी और व्यथित हो गए॥31॥
 
Due to that same radiance, even sages like you who were endowed with great austerity, powerful like the gods, conquerors of anger and possessed of controlled senses, were afflicted and distressed. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)