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mahabharat 13.144.28: मधुसूदन! आपके मुख से अग्नि का प्रकट होना हमारे लिए अत्यंत आश्चर्य की बात है। हम संशय में हैं। हे शुभ श्रीकृष्ण! केवल आप ही इसका कारण बताकर हमारे संशय और आश्चर्य का निवारण कर सकते हैं॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 13.144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.144.28 
एवं नो विस्मयकरं संशयं मधुसूदन।
त्वमेवार्हसि कल्याण वक्तुं वह्नेर्विनिर्गमम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! आपके मुख से अग्नि का प्रकट होना हमारे लिए अत्यंत आश्चर्य की बात है। हम संशय में हैं। हे शुभ श्रीकृष्ण! केवल आप ही इसका कारण बताकर हमारे संशय और आश्चर्य का निवारण कर सकते हैं॥ 28॥
 
Madhusudan! The emergence of fire from your mouth has been so astonishing for us. We are in a state of doubt. Auspicious Sri Krishna! Only you can tell us the reason for this and remove our doubt and astonishment.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)