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mahabharat 13.144.20: तत्पश्चात् उस पर्वत को जला हुआ देखकर शत्रुसूदन श्रीकृष्ण ने अपनी कोमल दृष्टि डाली और उसे उसकी स्वाभाविक अवस्था में लौटा दिया - उसे पहले जैसा हरा-भरा कर दिया॥20॥   |   mahabharat अध्याय 13.144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 144: तपस्वी श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और उनसे वार्तालाप करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.144.20 
ततो विष्णुर्गिरिं दृष्ट्वा निर्दग्धमरिकर्शन:।
सौम्यैर्दृष्टिनिपातैस्तं पुन: प्रकृतिमानयत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस पर्वत को जला हुआ देखकर शत्रुसूदन श्रीकृष्ण ने अपनी कोमल दृष्टि डाली और उसे उसकी स्वाभाविक अवस्था में लौटा दिया - उसे पहले जैसा हरा-भरा कर दिया॥20॥
 
Thereafter, seeing that mountain burnt, Shatrusudan Shri Krishna cast his gentle glance and returned it to its natural state - made it green as before. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)