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mahabharat 13.142.6: संस्कृति के पुत्र राजा रन्तिदेव ने महात्मा वशिष्ठ मुनि को विधिपूर्वक अर्घ्य दिया, जिससे उन्हें उत्तम लोकों की प्राप्ति हुई। 6॥   |   mahabharat अध्याय 13.142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.142.6 
रन्तिदेवश्च सांकृत्यो वसिष्ठाय महात्मने।
अर्घ्यं प्रदाय विधिवल्लेभे लोकाननुत्तमान्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
संस्कृति के पुत्र राजा रन्तिदेव ने महात्मा वशिष्ठ मुनि को विधिपूर्वक अर्घ्य दिया, जिससे उन्हें उत्तम लोकों की प्राप्ति हुई। 6॥
 
King Rantidev, son of Sankriti, ritually offered Arghya to Mahatma Vashishtha Muni, due to which he attained the best worlds. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)