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mahabharat 13.142.16: करन्धम के पौत्र अविक्षित के पुत्र महाराज मरुत्त ने अंगिरा के पुत्र संवर्त को अपनी पत्नी का दान देकर शीघ्र ही स्वर्ग में स्थान प्राप्त किया ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 13.142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.142.16 
करन्धमस्य पौत्रस्तु मरुत्तोऽविक्षित: सुत:।
कन्यामांगिरसे दत्त्वा दिवमाशु जगाम स:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
करन्धम के पौत्र अविक्षित के पुत्र महाराज मरुत्त ने अंगिरा के पुत्र संवर्त को अपनी पत्नी का दान देकर शीघ्र ही स्वर्ग में स्थान प्राप्त किया ॥16॥
 
Maharaja Marutta, son of Avikshit, grandson of Karandham, soon attained a place in heaven by donating his wife to Samvarta, son of Angira. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)