vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन
»
श्लोक 10
श्लोक
13.142.10
वृषादर्भिश्च राजर्षी रत्नानि विविधानि च।
रम्यांश्चावसथान् दत्त्वा द्विजेभ्यो दिवमागत:॥ १०॥
अनुवाद
ब्राह्मणों को नाना प्रकार के रत्न और सुन्दर भवन दान करके राजा वृषदर्भि ने स्वर्ग में स्थान प्राप्त किया।
By gifting various kinds of gems and beautiful houses to the brahmins, king Vrishadharbhi attained a place in heaven.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×