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mahabharat 13.142.1: युधिष्ठिर ने पूछा- भरतनन्दन! पितामह! आप कहते हैं कि दान और तप दोनों से मनुष्य स्वर्ग जा सकता है, किन्तु मैं संशय के कारण दुःखी हो रहा हूँ। कृपया इसका समाधान करें। कृपा करके मुझे बताएँ कि इस पृथ्वी पर दान और तप में से कौन-सा श्रेष्ठ है॥ 1॥   |   mahabharat अध्याय 13.142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 142: दानसे स्वर्गलोकमें जानेवाले राजाओंका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.142.1 
युधिष्ठिर उवाच
दानेन वर्ततेत्याह तपसा चैव भारत।
तदेतन्मे मनोदु:खं व्यपोह त्वं पितामह।
किंस्वित् पृथिव्यां ह्येतन्मे भवान् शंसितुमर्हति॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- भरतनन्दन! पितामह! आप कहते हैं कि दान और तप दोनों से मनुष्य स्वर्ग जा सकता है, किन्तु मैं संशय के कारण दुःखी हो रहा हूँ। कृपया इसका समाधान करें। कृपा करके मुझे बताएँ कि इस पृथ्वी पर दान और तप में से कौन-सा श्रेष्ठ है॥ 1॥
 
Yudhishthira asked-Bharatanandan! Grandfather! You say that a man can go to heaven through both charity and penance, but I am feeling sad due to doubt. Please solve this. Kindly tell me which of charity and penance is the best on this earth.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)