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श्लोक 13.141.1  |
युधिष्ठिर उवाच
उक्तास्तु भवता भोज्यास्तथाभोज्याश्च सर्वश:।
अत्र मे प्रश्नसंदेहस्तन्मे वद पितामह॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| युधिष्ठिर बोले - "पितामह! आपने भक्ष्य और अभक्ष्य सभी प्रकार के लोगों का वर्णन किया है; परंतु इस विषय में मेरे मन में एक शंका है, जो मुझे पूछनी चाहिए। कृपया उसका समाधान करें॥1॥ |
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| Yudhishthira said, "Grandfather! You have described all kinds of people, edible and non-edible; but I have a doubt in this matter which I should ask. Please solve it for me.॥ 1॥ |
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