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mahabharat 13.140.5: जो ब्राह्मण शूद्र के घर का अन्न खाता है, वह सम्पूर्ण पृथ्वी और समस्त मनुष्यों का मल पीता और खाता है ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 13.140: जिनका अन्न ग्रहण करने योग्य है और जिनका ग्रहण करने योग्य नहीं है, उन मनुष्योंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.140.5 
शूद्राणामथ यो भुङ्‍‍क्ते स भुङ्‍‍क्ते पृथिवीमलम्।
मलं नृणां स पिबति मलं भुङ्‍‍क्ते जनस्य च॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण शूद्र के घर का अन्न खाता है, वह सम्पूर्ण पृथ्वी और समस्त मनुष्यों का मल पीता और खाता है ॥5॥
 
A Brahmin who eats food from a Shudra's house, drinks and consumes the excreta of the entire earth and all human beings. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)