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mahabharat 13.140.3: इसी प्रकार क्षत्रियों को भी ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यों के घर ही भोजन करना चाहिए। जो शूद्र सब कुछ भक्ष्य-अभक्ष्य का विचार किए बिना ही खा लेता है तथा शास्त्रविरुद्ध आचरण करता है, उसका भोजन भी उसके लिए अस्वीकार्य है। 3॥   |   mahabharat अध्याय 13.140: जिनका अन्न ग्रहण करने योग्य है और जिनका ग्रहण करने योग्य नहीं है, उन मनुष्योंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 140: जिनका अन्न ग्रहण करने योग्य है और जिनका ग्रहण करने योग्य नहीं है, उन मनुष्योंका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.140.3 
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्या भोज्या वै क्षत्रियस्य ह।
वर्जनीयास्तु वै शूद्रा: सर्वभक्षा विकर्मिण:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार क्षत्रियों को भी ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यों के घर ही भोजन करना चाहिए। जो शूद्र सब कुछ भक्ष्य-अभक्ष्य का विचार किए बिना ही खा लेता है तथा शास्त्रविरुद्ध आचरण करता है, उसका भोजन भी उसके लिए अस्वीकार्य है। 3॥
 
Similarly, Kshatriyas should eat food only at the homes of Brahmins, Kshatriyas and Vaishyas. The food of the Shudras, who eat everything without considering whether it is edible or non-food, and who behave against the scriptures, is also unacceptable for him. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)