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mahabharat 13.140.21: कुन्तीनंदन! मैंने उन लोगों का परिचय दे दिया है जिनके यहाँ भोजन करना चाहिए और जिनके यहाँ भोजन नहीं करना चाहिए। अब आप मुझसे और क्या सुनना चाहते हैं?   |   mahabharat अध्याय 13.140: जिनका अन्न ग्रहण करने योग्य है और जिनका ग्रहण करने योग्य नहीं है, उन मनुष्योंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.140.21 
अभोज्याश्चैव भोज्याश्च मया प्रोक्ता यथाविधि।
किमन्यदद्य कौन्तेय मत्तस्त्वं श्रोतुमिच्छसि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनंदन! मैंने उन लोगों का परिचय दे दिया है जिनके यहाँ भोजन करना चाहिए और जिनके यहाँ भोजन नहीं करना चाहिए। अब आप मुझसे और क्या सुनना चाहते हैं?
 
Kunti Nandan! I have duly introduced the people at whose places one should eat and those at whose places one should not eat. Now what else do you want to hear from me? 21.
 
इतिश्री महाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि भोज्याभोज्यान्नकथनं नाम पञ्चत्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें भोज्याभोज्यान्नकथन नामक एक सौ पैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)