Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.140.16-17: जो कलंकित व्यक्ति का अन्न खाता है, वह रक्तपिपासु कहलाता है। जो चुगली करने वाले का अन्न खाता है, वह ब्राह्मण-हत्या के समान माना गया है। अनादर और उपेक्षापूर्वक दिया गया अन्न कभी ग्रहण नहीं करना चाहिए।॥16-17॥ | mahabharat अध्याय 13.140: जिनका अन्न ग्रहण करने योग्य है और जिनका ग्रहण करने योग्य नहीं है, उन मनुष्योंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वचनीयस्य यो भुङ्क्ते तमाहु: शोणितं ह्रदम्।
पिशुनं भोजनं भुङ्क्ते ब्रह्महत्यासमं विदु:॥ १६॥
असत्कृतमवज्ञातं न भोक्तव्यं कदाचन॥ १७॥
अनुवाद
जो कलंकित व्यक्ति का अन्न खाता है, वह रक्तपिपासु कहलाता है। जो चुगली करने वाले का अन्न खाता है, वह ब्राह्मण-हत्या के समान माना गया है। अनादर और उपेक्षापूर्वक दिया गया अन्न कभी ग्रहण नहीं करना चाहिए।॥16-17॥
The one who eats the food of a tainted person is called a pool of blood. The one who eats the food of a backbiter is considered to be equivalent to killing a brahmin. Food offered with disrespect and disregard should never be accepted.॥16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥