Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.140.15: जो अपनी विद्या बेचकर जीविका चलाने वाले तथा ऋषियों द्वारा आदरणीय ब्राह्मण का अन्न खाता है, उसका अन्न भी शूद्र के समान है। अतः ऋषि को उसका त्याग कर देना चाहिए॥15॥ | mahabharat अध्याय 13.140: जिनका अन्न ग्रहण करने योग्य है और जिनका ग्रहण करने योग्य नहीं है, उन मनुष्योंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विद्योपजीविनोऽन्नं च यो भुङ्क्ते साधुसम्मत:।
तदप्यन्नं यथा शौद्रं तत् साधु: परिवर्जयेत्॥ १५॥
अनुवाद
जो अपनी विद्या बेचकर जीविका चलाने वाले तथा ऋषियों द्वारा आदरणीय ब्राह्मण का अन्न खाता है, उसका अन्न भी शूद्र के समान है। अतः ऋषि को उसका त्याग कर देना चाहिए॥15॥
The one who eats the food of a Brahmin who earns his living by selling his knowledge and is respected by the sages, his food is also like that of a Shudra. Therefore, a sage should abandon her. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥