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mahabharat 13.140.12: जो निर्लज्ज मनुष्य शूद्रों के समान कर्म करने वाले इन द्विजों के घर में भोजन करता है, वह अभक्ष्य का पाप करता है और घोर भय का भागी होता है ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 13.140: जिनका अन्न ग्रहण करने योग्य है और जिनका ग्रहण करने योग्य नहीं है, उन मनुष्योंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.140.12 
शूद्रकर्मस्वथैतेषु यो भुङ्‍‍क्ते निरपत्रप:।
अभोज्यभोजनं भुक्त्वा भयं प्राप्नोति दारुणम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जो निर्लज्ज मनुष्य शूद्रों के समान कर्म करने वाले इन द्विजों के घर में भोजन करता है, वह अभक्ष्य का पाप करता है और घोर भय का भागी होता है ॥12॥
 
The shameless person who eats food in the house of these Dwijas who perform Shudra-like acts, commits the sin of eating non-food and faces severe fear. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)