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mahabharat 13.140.11: जो चिकित्सा करता है, जो शास्त्र बेचकर जीविका चलाता है, ग्राम का मुखिया, पुरोहित, कुंडली बताने वाला ज्योतिषी तथा जो वेद और शास्त्रों को छोड़कर अन्य व्यर्थ पुस्तकें पढ़ता है, ये सब ब्राह्मण और शूद्र के समान हैं ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 13.140: जिनका अन्न ग्रहण करने योग्य है और जिनका ग्रहण करने योग्य नहीं है, उन मनुष्योंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 140: जिनका अन्न ग्रहण करने योग्य है और जिनका ग्रहण करने योग्य नहीं है, उन मनुष्योंका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.140.11 
चिकित्सक: काण्डपृष्ठ: पुराध्यक्ष: पुरोहित:।
सांवत्सरो वृथाध्यायी सर्वे ते शूद्रसम्मिता:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो चिकित्सा करता है, जो शास्त्र बेचकर जीविका चलाता है, ग्राम का मुखिया, पुरोहित, कुंडली बताने वाला ज्योतिषी तथा जो वेद और शास्त्रों को छोड़कर अन्य व्यर्थ पुस्तकें पढ़ता है, ये सब ब्राह्मण और शूद्र के समान हैं ॥11॥
 
The one who heals, who earns his living by selling scriptures, the village head, the priest, the astrologer who tells the horoscope and the one who reads useless books other than Vedas and scriptures, all of them are like Brahmins and Shudras. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)