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युधिष्ठिर उवाच
के भोज्या ब्राह्मणस्येह के भोज्या: क्षत्रियस्य ह।
तथा वैश्यस्य के भोज्या: के शूद्रस्य च भारत॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "हे भरत नन्दन! इस संसार में ब्राह्मण किसके घर भोजन करे, क्षत्रिय किसके घर भोजन करे तथा वैश्य और शूद्र किसके घर भोजन करें?॥1॥
Yudhishthira asked, "O Bharata Nandan! In this world, at whose place should a Brahmin eat, at whose house should a Kshatriya eat and at whose house should a Vaishya and Shudra eat?॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥