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mahabharat 13.14.d97: जिनके हजारों पेट, हजारों पैर और हजारों आंखें हैं, जो हजारों भुजाओं और हजारों मुखों से सुशोभित हैं, उन भगवान विष्णु को नमस्कार है।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d97
 
 
श्लोक  13.14.d97 
सहस्रोदारपादाय सहस्रनयनाय च।
सहस्रबाहवे चैव सहस्रवदनाय च॥
 
 
अनुवाद
जिनके हजारों पेट, हजारों पैर और हजारों आंखें हैं, जो हजारों भुजाओं और हजारों मुखों से सुशोभित हैं, उन भगवान विष्णु को नमस्कार है।
 
Salutations to Lord Vishnu who has thousands of stomachs, thousands of legs and thousands of eyes, who is adorned with thousands of arms and thousands of faces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)