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mahabharat 13.14.d96: जो कल्प का अन्त करने के लिए अत्यन्त भयंकर रूप धारण करते हैं, जो विश्वरूप, विश्वदेव, विश्वेश्वर और परमेश्वर हैं, उन श्रीहरि को नमस्कार है।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d96
 
 
श्लोक  13.14.d96 
घोररूपाय महते युगान्तकरणाय च।
विश्वाय विश्वदेवाय विश्वेशाय महात्मने॥
 
 
अनुवाद
जो कल्प का अन्त करने के लिए अत्यन्त भयंकर रूप धारण करते हैं, जो विश्वरूप, विश्वदेव, विश्वेश्वर और परमेश्वर हैं, उन श्रीहरि को नमस्कार है।
 
Salutations to Shri Hari, who assumes a very fearsome form to end the kalpa, who is the cosmic form, Vishwadev, Vishweshwar and the Supreme Being.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)