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mahabharat 13.14.d87-d88: मैं उन अग्निहोत्रों के पास, जिनकी स्तुति हजारों स्थानों पर होती थी, उन अद्भुत और अविनाशी श्रीहरि को खोजने लगा।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d87-d88
 
 
श्लोक  13.14.d87-d88 
तेषां तत्राग्निहोत्राणामीडितानां सहस्रश:॥
समीपे त्वद्भुततममपश्यमहमव्ययम्॥
 
 
अनुवाद
मैं उन अग्निहोत्रों के पास, जिनकी स्तुति हजारों स्थानों पर होती थी, उन अद्भुत और अविनाशी श्रीहरि को खोजने लगा।
 
I began to search for that wonderful and indestructible Shri Hari near those Agnihotras that were praised in thousands of places.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)