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mahabharat 13.14.d86: वहाँ जाकर भी मैं उन वरदान देने वाले देवता नारायण देव के दर्शन नहीं कर सका।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d86
 
 
श्लोक  13.14.d86 
अथाहं वरदं देवं नापश्यं तत्र सङ्गतम्।
 
 
अनुवाद
वहाँ जाकर भी मैं उन वरदान देने वाले देवता नारायण देव के दर्शन नहीं कर सका।
 
Even after going there I could not see that boon-giving deity Narayana Dev.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)