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mahabharat 13.14.d79: वहाँ 'भो' शब्द बोलने में कुशल भगवान् ने मेघ के समान शान्त एवं गम्भीर वाणी से इस प्रकार कहा - 'हे गरुड़! यह मैं ही हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.14.d79 
तत्राम्बुधरधीरेण भो:शब्देनानुनादिना।
अयं भोऽहमिति प्राह वाक्यं वाक्यविशारद:॥
 
 
अनुवाद
वहाँ 'भो' शब्द बोलने में कुशल भगवान् ने मेघ के समान शान्त एवं गम्भीर वाणी से इस प्रकार कहा - 'हे गरुड़! यह मैं ही हूँ।'
 
There, the Lord, skilled in speaking with the word 'Bho', uttered in a voice as calm and serious as that of a cloud, spoke thus - 'O Garuda! It is me.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)