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mahabharat 13.14.d77: सर्वशक्तिमान, तेजस्वी और आत्मा के ज्ञाता भगवान श्री हरि आकाश में बहुत दूर तक यात्रा करके ऐसे देश में पहुँचे, जो मन के लिए भी दुर्गम था।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.14.d77 
स गत्वा दीर्घमध्वानमाकाशममितद्युति:।
मनसाप्यगमं देशमाससादात्मतत्त्ववित्॥
 
 
अनुवाद
सर्वशक्तिमान, तेजस्वी और आत्मा के ज्ञाता भगवान श्री हरि आकाश में बहुत दूर तक यात्रा करके ऐसे देश में पहुँचे, जो मन के लिए भी दुर्गम था।
 
Lord Shri Hari, the almighty and brilliant and knower of the soul, traveled a long distance in the sky and reached a country which was inaccessible even to the mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)