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mahabharat 13.14.d71: मैं यह जानने की इच्छा से आपके चरणों में आया हूँ कि आप कौन हैं, किसके हैं और कहाँ रहते हैं। हे प्रभु! कृपया मेरी रक्षा करें।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d71
 
 
श्लोक  13.14.d71 
अहं तु तत्त्वजिज्ञासु: कोऽसि कस्यासि कुत्र वा।
सम्प्राप्त: पदवीं देव स मां संत्रातुमर्हसि॥
 
 
अनुवाद
मैं यह जानने की इच्छा से आपके चरणों में आया हूँ कि आप कौन हैं, किसके हैं और कहाँ रहते हैं। हे प्रभु! कृपया मेरी रक्षा करें।
 
I have come to your feet with the desire to know in detail who you are, whose you belong to and where you live. O Lord! Please protect me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)