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mahabharat 13.14.d5: तत्पश्चात् देवताओं के साथ कमल पर विराजमान ब्रह्माजी हाथ जोड़कर रोग और शोक से रहित भगवान नारायण की स्तुति करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d5
 
 
श्लोक  13.14.d5 
तत: स देवै: सहित: पद्मयोनिर्नरेश्वर।
तुष्टाव प्राञ्जलिर्भूत्वा नारायणमनामयम्॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवताओं के साथ कमल पर विराजमान ब्रह्माजी हाथ जोड़कर रोग और शोक से रहित भगवान नारायण की स्तुति करने लगे।
 
Nareshwar! Thereafter, Brahmaji, seated in lotus position along with the gods, started praising Lord Narayana who was free from diseases and sorrows with folded hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)