Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.14.d49-d50: हे पक्षीश्रेष्ठ गरुड़! मैं तुम्हें यह महान वरदान देता हूँ कि चाहे देवता हों या असुर, इस संसार में कोई भी तुम्हारे समान शक्तिशाली नहीं होगा। तुम मेरे वाहन बन जाओ और मेरे मित्र होने के कारण सदैव अजेय रहोगे। | mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वाहनं भव मे साधु वरं दद्मि तवोत्तमम्।
न ते वीर्येण सदृश: कश्चिल्लोके भविष्यति॥
पतङ्ग पततां श्रेष्ठ न देवो नापि दानव:।
मत्सखित्वमनुप्राप्तो दुर्धर्षश्च भविष्यसि॥
अनुवाद
हे पक्षीश्रेष्ठ गरुड़! मैं तुम्हें यह महान वरदान देता हूँ कि चाहे देवता हों या असुर, इस संसार में कोई भी तुम्हारे समान शक्तिशाली नहीं होगा। तुम मेरे वाहन बन जाओ और मेरे मित्र होने के कारण सदैव अजेय रहोगे।
O Garuda, the best of the birds! I give you this great boon that be it a god or a demon, no one in this world will be as powerful as you. You become my vehicle, and being my friend you will always remain invincible.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥