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mahabharat 13.14.d43: न तो आप और न ही मैं ईश्वर के वास्तविक स्वरूप को किसी भी तरह जान सकते हैं। ईश्वर ने स्वयं अपने बारे में मुझे जो कुछ बताया है, उसे सुनिए।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d43
 
 
श्लोक  13.14.d43 
न स्म शक्यो मया वेत्तुं न भवद्भि: कथंचन॥
यथा मां प्राह भगवांस्तथा तच्छ्रूयतां मम।
 
 
अनुवाद
न तो आप और न ही मैं ईश्वर के वास्तविक स्वरूप को किसी भी तरह जान सकते हैं। ईश्वर ने स्वयं अपने बारे में मुझे जो कुछ बताया है, उसे सुनिए।
 
Neither you nor I can know the true nature of God in any way. Listen to whatever God himself has told me about himself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)