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mahabharat 13.14.d3: दैत्यों द्वारा सताए जा रहे देवतागण व्यथित होकर अपने लिए आश्रय खोजते हुए समस्त देवताओं के स्वामी बुद्धिमान ब्रह्मा की शरण में गए।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.14.d3 
आर्तास्ते देवदेवेशं प्रपन्ना: शरणैषिण:।
पितामहं महाप्राज्ञं वध्यमाना: सुरेतरै:॥
 
 
अनुवाद
दैत्यों द्वारा सताए जा रहे देवतागण व्यथित होकर अपने लिए आश्रय खोजते हुए समस्त देवताओं के स्वामी बुद्धिमान ब्रह्मा की शरण में गए।
 
The gods, who were being harassed by the demons, became distressed and sought shelter for themselves and went to the shelter of the wise Brahma, the lord of all gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)