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mahabharat 13.14.d29: उनके बैठ जाने पर वहाँ बैठे हुए तपस्वी मुनियों ने विशाल, महाबुद्धिमान और अत्यंत तेजस्वी विनतानन्द गरुड़ से पूछा।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d29
 
 
श्लोक  13.14.d29 
तमासीनं महात्मानं वैनतेयं महाद्युतिम्।
ऋषय: परिपप्रच्छुर्महात्मानं तपस्विन:॥
 
 
अनुवाद
उनके बैठ जाने पर वहाँ बैठे हुए तपस्वी मुनियों ने विशाल, महाबुद्धिमान और अत्यंत तेजस्वी विनतानन्द गरुड़ से पूछा।
 
After he sat down, the ascetic sages sitting there asked the huge, great-minded and extremely brilliant Vinataananda Garuda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)