Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.14.d203: भरतनंदन! जब निश्चयबुद्धि वाला मनुष्य परमात्म तत्व को जानकर परमपद को प्राप्त कर लेता है, उसे परम मोक्ष या मोक्ष का द्वार कहते हैं। | mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरतनंदन! जब निश्चयबुद्धि वाला मनुष्य परमात्म तत्व को जानकर परमपद को प्राप्त कर लेता है, उसे परम मोक्ष या मोक्ष का द्वार कहते हैं।
Bharatnandan! When a person with a determined intellect attains the supreme state by knowing the divine essence, that is called ultimate salvation or the door to salvation.
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २०४ १/२ श्लोक मिलाकर कुल २१० १/२ श्लोक हैं, Last split of 2 chapters)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥