Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.14.d196: जो मनुष्य बुरे विचारों से रहित है, क्रोध पर विजय प्राप्त कर लेता है, समस्त प्राणियों के हित के लिए तत्पर रहता है तथा योगयुक्त होकर सदैव इसका जप करता है, वह भगवान विष्णु के लोक में जाता है। | mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनसूयुर्जितक्रोध: सर्वसत्त्वहिते रत:॥
य: पठेत् सततं युक्त: स व्रजेत् तत्सलोकताम्।
अनुवाद
जो मनुष्य बुरे विचारों से रहित है, क्रोध पर विजय प्राप्त कर लेता है, समस्त प्राणियों के हित के लिए तत्पर रहता है तथा योगयुक्त होकर सदैव इसका जप करता है, वह भगवान विष्णु के लोक में जाता है।
One who is free from evil thoughts, overcomes anger, is ready for the benefit of all living beings and always recites it while being yogic, will go to the world of Lord Vishnu.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥