Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.14.d187: तुम्हारी बुद्धि नष्ट न हो - यही सर्वोत्तम मार्ग है। तुम्हें प्रतिदिन मेरी भक्ति में लीन रहना चाहिए। इससे तुम्हें मेरे स्वरूप का सच्चा ज्ञान प्राप्त होगा। | mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मा मतिस्तव गान्नाशमेषा गतिरनुत्तमा॥
मद्भक्तो भव नित्यं त्वं ततो वेत्स्यसि मे पदम्।
अनुवाद
तुम्हारी बुद्धि नष्ट न हो - यही सर्वोत्तम मार्ग है। तुम्हें प्रतिदिन मेरी भक्ति में लीन रहना चाहिए। इससे तुम्हें मेरे स्वरूप का सच्चा ज्ञान प्राप्त होगा।
Your intelligence should not be destroyed - this is the best path. You should remain engaged in my devotion daily. This will give you the true understanding of my nature.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥