Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.14.d185: गरुड़! जो लोग सांसारिक ऐश्वर्य में आसक्त हैं, वे मेरे उस स्वरूप को नहीं जान सकते। जिन्होंने कर्मों के आरम्भ का मार्ग त्याग दिया है, नमस्कार से विमुख हो गए हैं और कामनाओं के बंधन से मुक्त हो गए हैं, वे तपस्वी उस सनातन परमेश्वर, परब्रह्म को प्राप्त होते हैं। | mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गरुड़! जो लोग सांसारिक ऐश्वर्य में आसक्त हैं, वे मेरे उस स्वरूप को नहीं जान सकते। जिन्होंने कर्मों के आरम्भ का मार्ग त्याग दिया है, नमस्कार से विमुख हो गए हैं और कामनाओं के बंधन से मुक्त हो गए हैं, वे तपस्वी उस सनातन परमेश्वर, परब्रह्म को प्राप्त होते हैं।
Garuda! Those who are attached to worldly prosperity cannot know that form of mine. Those who have left the path of beginning of actions, have turned away from salutations and are free from the bondage of desires, those ascetics attain that eternal Supreme God, the Supreme Brahma.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥