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mahabharat 13.14.d177: जो लोग यज्ञ के बारे में जानते हैं, वे मुझे यज्ञ कहते हैं। वेद के विद्वान मुझे वेद कहते हैं और ऋषिगण भी मुझे जप-यज्ञ कहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.14.d177 
मां यज्ञमाहुर्यज्ञज्ञा वेदं वेदविदो जना:।
मुनयश्चापि मामेव जपयज्ञं प्रचक्षते॥
 
 
अनुवाद
जो लोग यज्ञ के बारे में जानते हैं, वे मुझे यज्ञ कहते हैं। वेद के विद्वान मुझे वेद कहते हैं और ऋषिगण भी मुझे जप-यज्ञ कहते हैं।
 
Those who know about sacrifices call me sacrifice. The scholars of Vedas call me the Vedas and the sages also call me the Japa-Yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)