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mahabharat 13.14.d171: जो लोग शुद्ध कुल में जन्म लेते हैं, जो श्रेष्ठ द्विज हैं, जो श्रद्धापूर्वक मन से मेरी पूजा करते हैं, वे मेरी भक्ति से परम गति को प्राप्त होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d171
 
 
श्लोक  13.14.d171 
शुद्धाभिजनसम्पन्ना: श्रद्धायुक्तेन चेतसा॥
मद्भक्त्या च द्विजश्रेष्ठा गच्छन्ति परमां गतिम्।
 
 
अनुवाद
जो लोग शुद्ध कुल में जन्म लेते हैं, जो श्रेष्ठ द्विज हैं, जो श्रद्धापूर्वक मन से मेरी पूजा करते हैं, वे मेरी भक्ति से परम गति को प्राप्त होते हैं।
 
Those who are born in a pure family, who are the best Dwijas who worship me with a mind full of faith, they attain the supreme state through my devotion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)