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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा
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श्लोक d167
श्लोक
13.14.d167
यदेतत् परमं गुह्यमाख्यानं परमाद्भुतम्॥
यत्नेन तदशेषेण यथावच्छ्रोतुमर्हसि।
अनुवाद
यह अत्यन्त गुप्त एवं अत्यन्त अद्भुत कथा है; इसे ध्यानपूर्वक एवं यथार्थ रूप में सुनो।
This is a very secret and extremely wonderful story; listen to it carefully and in its true form.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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