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mahabharat 13.14.d164: जो लोग त्याग की शरण लेते हैं और मेरे ध्यान में तत्पर रहते हैं, वे मुझे प्राप्त होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.14.d164 
एकान्तिनो ध्यानपरा यतिभावाद् व्रजन्ति माम्।
 
 
अनुवाद
जो लोग त्याग की शरण लेते हैं और मेरे ध्यान में तत्पर रहते हैं, वे मुझे प्राप्त होते हैं।
 
Those who take refuge in renunciation and remain devoted to my meditation, they attain me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)