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mahabharat 13.14.d16: गरुड़ की पीठ पर बैठकर उन्होंने अपने तेज से अपने विरोधियों को भस्म कर दिया तथा अपनी भुजाओं के तेज और वैभव से समस्त राक्षसों का नाश कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d16
 
 
श्लोक  13.14.d16 
सुपर्णपृष्ठमास्थाय तेजसा प्रदहन्निव।
व्यधमद् दानवान् सर्वान् बाहुद्रविणतेजसा॥
 
 
अनुवाद
गरुड़ की पीठ पर बैठकर उन्होंने अपने तेज से अपने विरोधियों को भस्म कर दिया तथा अपनी भुजाओं के तेज और वैभव से समस्त राक्षसों का नाश कर दिया।
 
Sitting on the back of Garuda, He burned His opponents with His brilliance and destroyed all the demons with the brilliance and grandeur of His arms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)