Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.14.d151: जिनके हृदय ज्ञान के प्रकाश से शुद्ध हो गए हैं, जो चन्द्रमा की किरणों के समान तेजस्वी हैं, वे वेद मन्त्रों का स्पष्ट उच्चारण करते हुए वहाँ अग्नि की पूजा करते हैं। हे महात्मन! वे शुद्ध भाव से उन अग्नियों की सेवा करने की इच्छा रखते हैं। | mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ज्ञानामलाशयास्तस्मिन् ये च चन्द्रांशुनिर्मला:।
उपासीना गृणन्तोऽग्निं प्रस्पष्टाक्षरभाषिण:॥
आकाङ्क्षमाणा: शुचयस्तेष्वग्निषु विहङ्गम।
अनुवाद
जिनके हृदय ज्ञान के प्रकाश से शुद्ध हो गए हैं, जो चन्द्रमा की किरणों के समान तेजस्वी हैं, वे वेद मन्त्रों का स्पष्ट उच्चारण करते हुए वहाँ अग्नि की पूजा करते हैं। हे महात्मन! वे शुद्ध भाव से उन अग्नियों की सेवा करने की इच्छा रखते हैं।
Those whose hearts have been purified by the light of knowledge, who are bright like the rays of the moon, they worship the fire there by reciting the Vedic mantras while pronouncing the words clearly. O great one! They desire to serve those fires with pure intentions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥