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mahabharat 13.14.d148-d149: जिन्होंने निष्काम भाव से अपने समस्त विचारों को नष्ट कर दिया है, जो सदैव ज्ञान में मन को एकाग्र रखते हैं, जिन्होंने अपनी आत्मा में अग्नि को स्थापित कर लिया है, तथा भोजन (सुख) और इच्छाओं का त्याग कर दिया है, जिनकी भौतिक वस्तुओं की प्राप्ति में कोई रुचि नहीं है, जो सभी प्रकार के बंधनों से मुक्त हैं और ज्ञान की दृष्टि से संपन्न हैं, वे धैर्यवान पुरुष, जो स्वभाव से ही नियम का पालन करने वाले हैं और जो अनन्य मन से मेरा ध्यान करते हैं, वे मुझे ही प्राप्त होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d148-d149
 
 
श्लोक  13.14.d148-d149 
अकामहतसंकल्पा ज्ञाने नित्यं समाहिता:।
आत्मन्यग्नीन् समाधाय निराहारा निराशिष:॥
विषयेषु निरारम्भा विमुक्ता ज्ञानचक्षुष:।
अनन्यमनसो धीरा: स्वभावनियमान्विता:॥
 
 
अनुवाद
जिन्होंने निष्काम भाव से अपने समस्त विचारों को नष्ट कर दिया है, जो सदैव ज्ञान में मन को एकाग्र रखते हैं, जिन्होंने अपनी आत्मा में अग्नि को स्थापित कर लिया है, तथा भोजन (सुख) और इच्छाओं का त्याग कर दिया है, जिनकी भौतिक वस्तुओं की प्राप्ति में कोई रुचि नहीं है, जो सभी प्रकार के बंधनों से मुक्त हैं और ज्ञान की दृष्टि से संपन्न हैं, वे धैर्यवान पुरुष, जो स्वभाव से ही नियम का पालन करने वाले हैं और जो अनन्य मन से मेरा ध्यान करते हैं, वे मुझे ही प्राप्त होते हैं।
 
Those who have destroyed all their thoughts by disinterestedness, who always keep their mind focused on knowledge and who have established the fire in their soul and have given up food (pleasures) and desires, who have no inclination for the attainment of material things, who are free from all kinds of bondages and are endowed with the vision of knowledge, those patient men who are naturally rule-abiding and who meditate on Me with undivided mind, attain Me alone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)