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mahabharat 13.14.d13: भीष्मजी कहते हैं - राजन! इस प्रकार ब्रह्मा आदि देवताओं ने एकत्र होकर ऋक्, साम और यजुर्वेद के मन्त्रों से भगवान विष्णु की स्तुति की।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d13
 
 
श्लोक  13.14.d13 
भीष्म उवाच
एवमादिपुरस्कारैर्ऋक्सामयजुषां गणै:।
वैकुण्ठं तुष्टुवुर्देवा: समेत्य ब्रह्मणा सह॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन! इस प्रकार ब्रह्मा आदि देवताओं ने एकत्र होकर ऋक्, साम और यजुर्वेद के मन्त्रों से भगवान विष्णु की स्तुति की।
 
Bhishmaji says – King! In this way, the gods including Brahma gathered together and praised Lord Vishnu with the mantras of Rik, Sama and Yajurveda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)