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mahabharat 13.14.d128: यदि आप मुझे अपना भक्त मानते हैं अथवा मुझ पर आपकी कृपा है, तो कृपया यह सब मुझे पूर्ण रूप से बताइये, यदि यह मेरे सुनने योग्य हो।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d128
 
 
श्लोक  13.14.d128 
यदि जानासि मां भक्तं यदि वानुग्रहो मयि।
शंस सर्वमशेषेण श्रोतव्यं यदि चेन्मया॥
 
 
अनुवाद
यदि आप मुझे अपना भक्त मानते हैं अथवा मुझ पर आपकी कृपा है, तो कृपया यह सब मुझे पूर्ण रूप से बताइये, यदि यह मेरे सुनने योग्य हो।
 
If you consider me your devotee or if you have mercy on me, then please tell me all this in full, if it is worth my hearing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)