Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.14.d109: जो अपने हाथ में सुन्दर कमल धारण करते हैं, जो स्वयं हमारे समान हैं, जो स्वयं धारण करने वाले तथा दूसरों को धारण कराने वाले परम पुरुष हैं, जो सौम्य हैं, जिनका स्वरूप सौम्य है तथा जिनका मन सौम्य एवं सुन्दर है, उन श्री हरि को नमस्कार है। | mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो अपने हाथ में सुन्दर कमल धारण करते हैं, जो स्वयं हमारे समान हैं, जो स्वयं धारण करने वाले तथा दूसरों को धारण कराने वाले परम पुरुष हैं, जो सौम्य हैं, जिनका स्वरूप सौम्य है तथा जिनका मन सौम्य एवं सुन्दर है, उन श्री हरि को नमस्कार है।
Salutations to Shri Hari who holds the beautiful lotus in his hand, who is himself like ourselves, who is the supreme being who wears and makes others wear it, who is mild, has a mild form and who has a mild and beautiful mind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥