Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.14.d101: जो गरुड़ के समान रूप वाले, तीन नेत्रों वाले (रुद्र के रूप वाले), उत्तम निवास वाले, वृषभ राशि वाले, धर्म के रक्षक, सबके सम्राट, भयंकर रूप वाले, शुभ कर्मों वाले, रजोगुण से रहित, सबकी उत्पत्ति के कारण और जगत् के स्वरूप हैं, उन श्रीहरि को नमस्कार है। | mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो गरुड़ के समान रूप वाले, तीन नेत्रों वाले (रुद्र के रूप वाले), उत्तम निवास वाले, वृषभ राशि वाले, धर्म के रक्षक, सबके सम्राट, भयंकर रूप वाले, शुभ कर्मों वाले, रजोगुण से रहित, सबकी उत्पत्ति के कारण और जगत् के स्वरूप हैं, उन श्रीहरि को नमस्कार है।
Salutations to Shri Hari who has the form of Garuda, has three eyes (form of Rudra), has excellent abode, is of Taurus, protector of Dharma, emperor of all, has a fierce form, is of good deeds, is devoid of Rajoguna, is the cause of the origin of all and is the form of the universe.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥