श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d10
 
 
श्लोक  13.14.d10 
त्रायस्व देवता वीर दानवाद्यै: सुपीडिता:।
लोकांश्च लोकपालांश्च ऋषींश्च जयतां वर॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! ये देवतागण दैत्यों, राक्षसों आदि से अत्यन्त पीड़ित हैं। कृपया इनकी रक्षा कीजिए। हे विजयी पुरुषों में श्रेष्ठ नारायणदेव! आप लोकों, लोकों के रक्षकों और ऋषियों की रक्षा कीजिए।
 
Brave! These gods are suffering a lot from demons, monsters etc. Please protect them. O Narayandev, the best among the victorious ones! Please protect the worlds, the protectors of the worlds and the sages.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)