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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 139: स्कन्ददेवका धर्मसम्बन्धी रहस्य तथा भगवान् विष्णु और भीष्मजीके द्वारा माहात्म्यका वर्णन
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श्लोक 14
श्लोक
13.139.14
कृत्वापि पापकं कर्म महापातकवर्जितम्।
रहस्यधर्मं श्रुत्वेमं सर्वपापै: प्रमुच्यते॥ १४॥
अनुवाद
यदि मनुष्य बड़े-बड़े पापों को छोड़कर अन्य सभी पाप भी करता हो, तो भी यदि वह धर्म के इस रहस्य को सुन ले, तो वह उन सभी पापों से मुक्त हो जाएगा ॥14॥
Even if a man commits all sins except the greatest sins, if he listens to this secret of religion, he will be freed from all those sins. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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