श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 139: स्कन्ददेवका धर्मसम्बन्धी रहस्य तथा भगवान‍् विष्णु और भीष्मजीके द्वारा माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  13.139.12-13 
श्रावयंश्चापि विप्रेन्द्रान् पर्वसु प्रयतो नर:॥ १२॥
ऋषीणां देवतानां च पितॄणां चैव नित्यदा।
भवत्यभिमत: श्रीमान् धर्मेषु प्रयत: सदा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य पर्व के दिन शुद्ध मन से श्रेष्ठ ब्राह्मणों को धर्म के इन रहस्यों का श्रवण कराएगा, वह देवता, ऋषि और पितरों द्वारा सदैव सम्मानित होगा और समृद्ध होगा। उसकी सदैव धर्म में रुचि बनी रहेगी॥12-13॥
 
The person who on the day of the festival with a pure mind will make the best Brahmins listen to these secrets of religion, he will always be respected by the gods, sages and ancestors and will be prosperous. He will always have an inclination towards religion.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)