श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 139: स्कन्ददेवका धर्मसम्बन्धी रहस्य तथा भगवान‍् विष्णु और भीष्मजीके द्वारा माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  13.139.11-12h 
नास्य पापं प्रभवति न च पापेन लिप्यते।
पठेद् वा श्रावयेद्वापि श्रुत्वा वा लभते फलम्॥ ११॥
भुञ्जते पितरो देवा हव्यं कव्यमथाक्षयम्।
 
 
अनुवाद
उस पर कभी पाप का प्रभाव नहीं होगा, उस पर कभी पाप का कलंक नहीं लगेगा। जो कोई इस कथा को पढ़ेगा, दूसरों को सुनाएगा अथवा स्वयं सुनेगा, उसे भी उन धार्मिक नियमों का पालन करने का फल मिलेगा। उसके द्वारा अर्पित किए गए तर्पण अक्षय होंगे तथा देवता और पितर उन्हें प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करेंगे। 11 1/2।
 
He will never be affected by sin, he will never be tainted by sin. Whoever reads this story, narrates it to others or listens to it himself, he will also get the fruits of following those religious principles. The oblations offered by him will be everlasting and the gods and ancestors will accept them with great pleasure. 11 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)