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mahabharat 13.135.8: अब दूसरे धर्म का रहस्यपूर्ण वर्णन सुनो, जो सुखदायक है और मनुष्यों को महान फल देने वाला है। उसका भक्तिपूर्वक पालन करना चाहिए। 8॥   |   mahabharat अध्याय 13.135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.135.8 
श्रूयतां चापरो धर्मो मनुष्याणां सुखावह:।
श्रद्दधानेन कर्तव्य: सरहस्यो महाफल:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अब दूसरे धर्म का रहस्यपूर्ण वर्णन सुनो, जो सुखदायक है और मनुष्यों को महान फल देने वाला है। उसका भक्तिपूर्वक पालन करना चाहिए। 8॥
 
Now listen to the secret description of another religion which is pleasurable and gives great results to humans. It should be followed with devotion. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)